स्वामी दयानन्द सरस्वती: डीव्म्एव्म्वीव्म् का इतिहास और समाज के निर्माण में इसकी भूमिका

Authors

  • दिव्य प्रकाश शोधार्थी, इतिहास विभाग, बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय, अस्थल बोहर, रोहतक
  • डाॅ कुमारी सुमन सहायक प्रोफेसर, इतिहास विभाग, बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय, अस्थल बोहर, रोहतक

Keywords:

सामाजिक गतिविधि, सिद्धांत, अग्नि कर्मकांड

Abstract

किसी भी सामाजिक गतिविधि के पीछे की भावना उसकी सीमा और गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी निरंतरता को भी निर्धारित करती है। डीव्म्एव्म्वीव्म् के सामाजिक कार्यक्रम निवारक और सुधारात्मक दोनों रहे हैं। आर्य समाज के छठवें एवं नवे सिद्धांत के अनुसार, मनुष्य को सभी की भलाई के लिए कार्य करना सभी के शारीरिक, आध्यात्मिक और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देना चाहिए तथा स्वयं केंद्रित होने से बचना चाहिए। यज्ञ केवल अग्नि कर्मकांड नहीं है, बल्कि एक परोपकारी कार्य है जिसमें प्रत्येक जीवित प्राणी शामिल हैं।

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Published

2024-02-28

How to Cite

दिव्य प्रकाश, & डाॅ कुमारी सुमन. (2024). स्वामी दयानन्द सरस्वती: डीव्म्एव्म्वीव्म् का इतिहास और समाज के निर्माण में इसकी भूमिका. Innovative Research Thoughts, 10(1), 12–15. Retrieved from https://irt.shodhsagar.com/index.php/j/article/view/748